Draupadi

 mahasati draupadi ke chirharan ki story(महासती द्रौपदी के चीरहरण स्टोरी )

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 mythological story –  draupadi  chirharan story

  में आप जान सकेंगे कि,पुरुषप्रधान समाज में स्त्रियों के साथ  कितना  अन्याय होता  था और आज भी होता रहता हैं।

       Draupadi ke chirharan ki story   

लिखने का उद्देश्य आपको यही बताना हैं कि, सतयुग,त्रेतायुग,द्वापरयुग या फिर कलयुग हो।

   सभी युगों में स्त्रियों को हमेशा ही पुरुष की अपेक्षा ज्यादा सहन करना पड़ता हैं।

    अब आपको महासती द्रौपदी के चीरहरण की स्टोरी अपने शब्दो द्वारा 

बताने की कोशिश करते है।

समुद्रमंथन की कहानी


  उस दिन पांच पांडव अपनी पत्नी महारानी द्रौपदी के साथ हस्तिनापुर का आतिथ्य स्वीकार करने आए हुए थे।दुर्योधन और शकुनी ने पांडव और द्रौपदी को अपमानित करने का सारा बंदोबस्त कर रखा था। इसिके भागरूप दुर्योधन ने जुआ खेलने के बहाने पांडव की मेहनत से अर्जित की हुई संपति को छीन लेता है।बाद में उसने सम्राट युधिष्ठिर द्वारा उनके चारो भाई भीम,अर्जुन,सहदेव और नकुल को भी दाव पर लगा दिया। इस तरह पांडवो को  बिना युद्ध और शस्त्रों के पराजित कर उनका सब कुछ लूंट लिया और उन्हें अपना दास बना दिया। लेकिन  अभी भी उसकी लालसा कम नही हुई।अब उसने युधिष्ठिर को कहा कि, सारी संपत्ति वापस लेनी हो तो अपनी पत्नी द्रौपदी को दाव पर लगा दे। युधिष्ठिर खुद हार गए थे,फिर भी उन्होंने अपनी पत्नी को दाव पर लगा दिया।लेकिन,शकुनी के कपट से  दुर्योधन जीत गया ।

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    उसने अपने दास को बुलवाकर कहा कि,वह द्रौपदी को यहां सभा में आने का आदेश दे।वह दास को दुर्योधन का आदेश मानना पड़ा। लेकिन, महारानी द्रौपदी  के द्वारा मना करने पर दुर्योधन ने अपने भाई  दुःशासन को  द्रौपदी को बालों से पकड़कर घसीटकर सभा में लाने का आदेश दिया। लेकिन द्रौपदी भी किसीसे कम नही थी।उन्होंने खुद की रक्षा करने की पूरी कोशिश की। परंतु, उस वक्त उनकी शारीरिक क्षमता  दुःशासन की शक्ति के सामने  कम पड़ गई।द्रौपदी के बालों को पकड़कर घसीटकर सभा में लाया गया। वहां सभा में  जगत के सभी शूरवीर विद्यमान थे,लेकिन किसी ने द्रौपदी का साथ नही दिया।



  दुर्योधन  के दुष्ट कर्मों का अभी भी अंत नही हुआ और उसने सारी सभा के सामने द्रौपदी का चीरहरण करने का आदेश  दुःशासन को दिया।दुःशासन तो वैसे भी  बुद्धिहीन था।अपने भाई का आदेश मानके वह  Draupadi ka चीरहरण करने की चेष्टा करता है। सभा के सारे धर्म के ज्ञाता यह सब सिर्फ देखते रहे! किसी भी शूरवीर में इतनी हिम्मत नही थी कि, वह दुर्योधन का विरोध करके द्रौपदी के सम्मान की रक्षा करे!


  द्रौपदी ने पितामह भीष्म,गुरु द्रोण,महामंत्री विदुर,सभी पांच पांडव से  उसकी रक्षा करने की उम्मीद की।परंतु किसीने भी उनके सम्मान की रक्षा नही की। सभी लोग  सिर जुकाकर  दुर्योधन के बुरे कर्म देखते रहे।अब द्रौपदी को समज आ गया कि, इस सभा में उपस्थित किसी भी शूरवीर पुरुष में इतनी क्षमता ही नही है,जो उसके सम्मान की रक्षा  करे।

    इस विकट समस्या में द्रौपदी ने अपने परम सखा भगवान श्री कृष्ण को याद किया और अपने सारे दुःख उनको समर्पित करके उनका ही नाम जपने लगे। महासती द्रौपदी की भक्ति में इतनी शक्ति थी कि,भगवान कृष्ण भी  उनके सम्मान की रक्षा करने प्रकट हो गए। दुःशासन जब तक द्रौपदी के वस्त्र खींच रहा था,तब तक भगवान कृष्ण ने द्रौपदी के वस्त्र कम नहीं होने दिए और drupadi की रक्षा की।कहा जाता हैं कि, कृष्ण ने द्रौपदी के ९९९ चिर(वस्त्र) द्वारा रक्षा की थी।


मेरे विचार:👉

   हमारे मानव समाज में  ऐसी  बुराई का अभी भी अंत नही हुआ। आज के आधुनिक समय में भी कितनी ही स्त्रियों के साथ  किसी न किसी तरह अन्याय होता हैं। दुःख की बात तो यह है कि, स्त्रियों के साथ जितने अन्याय  बाहर की दुनिया में होते हैं उससे भी ज्यादा अन्याय अपने ही घर वह सहती है।सभी लोग स्त्री के सशक्तिकरण की  बाते तो करते हैं,लेकिन आज भी कई स्त्रियां हैं ,जो चुप रहकर अपने साथ हो रहे अन्याय को सह रही होती है।

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  स्त्रियों को मैं यही कहना चाहती हूं कि,जब भी किसी अन्य स्त्री के साथ अन्याय हो रहा हो तो अपने निजी स्वार्थ को त्यागकर उस स्त्री की सहायता करे।जब  एक स्त्री माता बनना सौभाग्य की बात है।लेकिन आपको संतान के रूप में लड़का मिला हो तो उसे बचपन से ही  स्त्री का सम्मान करना सिखाए। और अगर संतान के तौर पे लड़की हो तो उसे इतना मजबूत बनाए कि,वह खुद तो अपनी रक्षा कर सके,लेकिन दूसरी स्त्रियों की भी रक्षा करने में समर्थ हो।


  यह मेरे अपने विचार हैं।आपका इस बारे में क्या सोचना है वह comment box me जरूर बताएं।🙏