Krishna aur sudama ki short story

( कृष्ण–सुदामा की short story in Hindi)

Krishna aur sudama ki short story


हमारे जीवन में मां,पिताजी,भाई,बहन आदि सारे रिश्ते भगवान द्वारा हमें पहले से मिलते हैं।
   लेकिन एक ऐसा भी रिश्ता होता हैं,जो हम खुद बनाते हैं। और उस रिश्ते का नाम हैं–"दोस्ती"  ।  
  वैसे तो दोस्ती की कई सारी धार्मिक और आधुनिक मिसाले हैं,लेकिन उन  सबमें सबसे ऊपर अगर कोई दोस्ती की मिसाल हैं–"हमारे प्यारे भगवान श्रीकृष्ण और उनके सबसे अच्छे मित्र सुदामा"।
   आज हम आप सबको कृष्ण–सुदामा की दोस्ती की कहानी बताएंगे।
  बचपन से ही वह दोनों एकदुसरे के गाढ़ मित्र थे। गुरुकुल में उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने–अपने जीवन के लक्ष्य की ओर बढ़ गए।
कृष्ण–सुदामा की story in Hindi



कृष्ण–सुदामा की story in Hindi

   कृष्ण ने कई संघर्ष के  बाद द्वारिका नगरी बसाई । सुदामा गरीब ब्राह्मण थे, वह भिक्षा में जो भी मिलता उससे अपने परिवार का गुजरान कर लेते।
    समय बीतता गया और सुदामा की स्थिति काफी बुरी हो गई। घर  में खाने को अन्न का एक दाना भी नही था।
   एक दिन उनकी पत्नी ने कहा कि,आपके मित्र कृष्ण तो राजा हैं।आप उनसे ही मदद मांग लीजिए।
   सुदामा को काफी संकोच हो रहा था ।लेकिन अपने बच्चों का दुःख उनसे देखा नहीं गया ।
   सुदामा उनकी पत्नी द्वारा दिए पोहे की छोटी सी थैली लेकर द्वारिका जाने के लिए निकले।

   रास्ते में कई तकलीफे पार करके वह आखिर में द्वारिका पहुंच गए।
    लेकिन उनके मैले और फटे कपड़े देखकर महेल के द्वारपाल ने उन्हें अंदर जाने नही दिया।
     फिर सुदामा ने द्वारपाल से कृष्ण को संदेशा पहुंचाया कि,उनका मित्र सुदामा उन्हे मिलने आया था। यह कहकर वहां से निकल गए।
   कृष्ण तक यह संदेशा पहुंचते ही वह सुदामा को ढूंढ के अपने साथ महेल में लाए। 
   उनकी हालत देखकर कृष्ण का मन काफी दुःखी हुआ।फिर कृष्ण ने उन्हें अपनी राजगद्दी पर बैठकर उनकी सेवा की।
 दोनो मित्र बाते करने बैठे परंतु,  सुदामा कृष्ण को अपनी तकलीफ के बारे में कुछ कह नहीं पाए। 
   लेकिन, कृष्ण तो अंतर्यामी है वह तो सबकुछ जानते थे । इसीलिए जब तक सुदामा अपने गांव लौटकर आए तब तक तो उनके घर की कायापलट ही हो गई। 
  कृष्ण ने अपने मित्र के कहे बिना ही सुदामा की  गरीबी को दूर कर दिया।