माना जाता है कि, इसी दिन से सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था। इसी कारण इस दिन को युगादि तीज भी कहा जाता हैं। इसी दिन से ऋतु का भी परिवर्तन होता है ।किसान भी अपने ओजार और पशुओं। का पूजन करके खेती का प्रारंभ करते हैं।
इसी दिन लोकमाता गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था।महर्षि परशुराम का जन्म भी इसी दिन हुआ था।भगवान कृष्ण और सुदामा का मिलन भी इसी दिन हुआ था।साथ ही भगवान वेदव्यास ने भगवान गणेश के हाथो से महाभारत ग्रंथ की रचना का प्रारंभ भी किया था।
इस तरह इस दिन का बहुत ही महत्व है।
इस दिन दान का भी विशेष महत्व है। *तो चलिए अब इस पवित्र दिन को किए जानेवाले व्रत की विधि जानते हैं;
सबसे पहले इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जागकर नित्यक्रम पूरा करके ,स्नान आदि को पूरा करके घर के मंदिर में भगवान विष्णु की फोटो या मूर्ति के सामने ध्यान लगाकर हाथ में पवित्र जल लेकर व्रत का संकल्प करिए। उसके बाद भगवान विष्णुबको पंचामृत से स्नान कराकर पुष्पमाला अर्पण करके तुलसी के पत्ते अर्पण किए जाते हैं। फिर प्रसाद में घऊं के सत्तू,ककड़ी,और चने की दाल अर्पण की जाती हैं।
इसके बाद पूरे दिन उपवास किया जाता है।अगर आप पूरे दिन भूखे नहीं रह सकते तो फराल कर सकते हैं।
इसके बाद अगर आप सक्षम ही है तो आप गरीबों को कुछ दान भी कर सकते हों। इस दिन किया गया दान भी हमेशा अक्षय रहता है।भगवान विष्णु आपके घर को धनधान्य से संपन्न रखते हैं।
।।जय भगवान श्री हरि विष्णु।।
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